हल्द्वानी। अधिक ब्याज और सुरक्षित निवेश का झांसा देकर हजारों लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले बड़े वित्तीय घोटाले का नैनीताल पुलिस ने खुलासा किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजुनाथ टीसी के निर्देशों पर एक वर्ष से अधिक समय से लंबित इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर करीब 6 करोड़ 80 लाख रुपये के गबन का पर्दाफाश किया है।
प्रभारी निरीक्षक रामनगर सुशील कुमार के नेतृत्व में गठित विशेष पुलिस टीम ने कोतवाली रामनगर में दर्ज एफआईआर संख्या 246/23, धारा 409 आईपीसी के तहत मामले की गहन जांच की। विवेचना में सामने आया कि आरोपियों ने वर्ष 2017 में “देवभूमि बहुदेशीय स्वायत्त सहकारिता” नाम से संस्था की स्थापना कर हल्द्वानी के मुखानी क्षेत्र और रामनगर में शाखाएं संचालित कीं।
आरोपियों ने उत्तराखंड सरकार से पंजीकरण का दावा करते हुए अधिक लाभ और सुरक्षित निवेश का भरोसा दिलाकर अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल सहित कई जनपदों के हजारों लोगों से बड़ी धनराशि निवेश कराई। बाद में संस्था के अध्यक्ष हेमचंद पंत और सचिव विकास दुर्गापाल ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर निवेशकों से जुटाई गई लगभग 6.80 करोड़ रुपये की रकम का गबन कर लिया और फरार हो गए।
जांच में यह भी पाया गया कि संस्था की दोनों शाखाएं बंद हो चुकी थीं तथा आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। न्यायालय से वारंट और कुर्की आदेश प्राप्त करने के बाद पुलिस ने दिल्ली, हरियाणा और लखनऊ सहित कई स्थानों पर लगातार दबिश दी।
अंततः 4 फरवरी को पुलिस ने दोनों मुख्य आरोपियों को लालकुआं क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में 45 वर्षीय हेमचंद पंत, निवासी हरिपुर नायक कुसुमखेड़ा, थाना मुखानी तथा 41 वर्षीय विकास दुर्गापाल, निवासी देहरिया, कोतवाली हल्द्वानी शामिल हैं। जांच में हेमचंद पंत के खाते में 2 करोड़ 26 लाख रुपये और विकास दुर्गापाल के खाते में 1 करोड़ 58 लाख रुपये के लेन-देन की पुष्टि हुई है।
पुलिस के अनुसार आरोपियों के खिलाफ अन्य थानों में भी धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं और गिरोह में अन्य लोगों की संलिप्तता की संभावना है, जिनकी तलाश जारी है।
इस मामले के खुलासे के बाद एसएसपी डॉ. मंजुनाथ टीसी ने आमजन से अपील की है कि किसी भी निवेश योजना या संस्था में धन लगाने से पहले उसकी वैधानिक स्थिति, पंजीकरण और प्रामाणिकता की पूरी जांच अवश्य करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या ठगी की जानकारी तत्काल पुलिस को दें।



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