मानसून से पहले धामी सरकार का बड़ा एक्शन, बाढ़ रोकथाम को लेकर अधिकारियों की छुट्टी कैंसिल!

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उत्तराखंड में हर साल मानसून के दौरान पर्वतीय इलाकों में आपदा जैसे हालात और मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। खास तौर पर हरिद्वार और उधम सिंह नगर जिलों में बाढ़ के कारण फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को समय रहते सभी जरूरी कार्य पूरे करने के निर्देश दिए हैं, ताकि मानसून सीजन में जनता को बाढ़ से परेशान न होना पड़े।

शुक्रवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने सिंचाई परियोजनाओं के अंतर्गत रिवर प्रोटेक्शन कार्यों और डीसिल्टिंग की प्रगति की समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ की आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए सभी कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि लघु सिंचाई विभाग द्वारा जल संरक्षण, संवर्द्धन और जल संभरण योजनाओं के तहत चेक डैम, रिचार्ज शॉफ्ट और तालाबों का निर्माण किया जा रहा है। अब तक प्रदेश में कुल 708 चेक डैम बनाए जा चुके हैं।

सिंचाई विभाग ने उधम सिंह नगर, नैनीताल और हरिद्वार जिलों में कुल 419 रिचार्ज शॉफ्ट स्थापित किए हैं, जिससे सालाना लगभग 108.94 करोड़ लीटर भूजल रिचार्ज होने की संभावना है।

इसके अलावा, अधिकारियों ने बताया कि 9 वन प्रभागों में पेयजल विभाग और स्प्रिंग एवं रिवर रीजुविनेशन (SARA) अथॉरिटी के माध्यम से 14 जल स्रोतों के उपचार का कार्य किया जा रहा है। वहीं, कैंपा योजना (CAMPA) के तहत विभिन्न वन प्रभागों में 247 जलधाराओं का उपचार किया जा रहा है।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने वन विभाग को वनाग्नि की रोकथाम के लिए अभी से पूरी तैयारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए पर्याप्त मानव संसाधन और जरूरी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

सीएम ने वन पंचायतों और वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों से समन्वय बनाए रखने, वन संरक्षण में बेहतर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करने, समय पर फायर लाइनों की सफाई और वनभूमि पर अतिक्रमण हटाने को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।