धामी ने सुना ‘मन की बात’, बोले– देशभर के प्रेरणादायक लोगों को मिलती है पहचान

9
खबर शेयर करें -

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून के इन्द्रानगर स्थित होटल रॉयल इन पैलेस में आयोजित प्रधानमंत्री के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 132वें एपिसोड को जनप्रतिनिधियों और नागरिकों के साथ सुना। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम में उठाए गए विभिन्न विषयों पर अपने विचार भी साझा किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के इस एपिसोड में राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मार्च का महीना वैश्विक स्तर पर कई घटनाओं से भरा रहा है। कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया से नई शुरुआत की उम्मीद थी, लेकिन विभिन्न क्षेत्रों में जारी युद्ध और संघर्ष अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने ‘मन की बात’ को एक अनूठा जनसंवाद मंच बताया, जो समाज के विभिन्न वर्गों, खासकर सीमित संसाधनों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देशभर के प्रेरणादायक व्यक्तित्वों का उल्लेख कर नागरिकों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

धामी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री अपने कार्यक्रमों में अक्सर उत्तराखंड का उल्लेख करते हैं, जिससे राज्य की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है। प्रधानमंत्री द्वारा आदि कैलाश और उत्तरकाशी के हर्षिल-मुखवा जैसे क्षेत्रों के दौरे और उल्लेख का सकारात्मक प्रभाव पर्यटन पर साफ दिखाई दे रहा है।

उन्होंने जानकारी दी कि इस वर्ष उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला है। अब तक डेढ़ लाख से अधिक पर्यटक राज्य में आ चुके हैं, जबकि आदि कैलाश क्षेत्र में ही 36,700 से ज्यादा श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे हैं। यह राज्य में पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उत्तराखंड को ‘ऑल-सीजन टूरिज्म डेस्टिनेशन’ बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसके तहत बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, सड़क संपर्क में सुधार, आवासीय व्यवस्थाओं का विकास और डिजिटल सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि पर्यटन के जरिए स्थानीय लोगों की आजीविका बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ग्रामीण पर्यटन, होमस्टे योजना और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर दूरस्थ क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियों को गति दी जा रही है।