उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब इसका लाभ समाज के हर बच्चे तक समान रूप से पहुंचे। उन्होंने कहा कि बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना आज के समय की बड़ी आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री धामी रविवार को देहरादून के राजपुर रोड स्थित होटल हयात सेंट्रिक में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने ‘शाइन अवि विजुअल लर्निंग करिकुलम’ का शुभारंभ किया।
‘ब्रिजिंग लर्निंग गैप्स थ्रू विजुअल लर्निंग एंड अर्ली इंटरवेंशन’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के लिए समर्पित होकर कार्य करना ही वास्तविक सेवा है। उन्होंने कहा कि अपने लिए तो हर व्यक्ति काम करता है, लेकिन दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए किया गया प्रयास ही परमार्थ कहलाता है।
मुख्यमंत्री ने शाइन अवि ऑटिज्म फाउंडेशन की संस्थापक अनीता शर्मा थपलियाल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संवेदनशील सोच, मजबूत संकल्प और सकारात्मक दृष्टिकोण समाज में बदलाव लाने की ताकत रखते हैं।
उन्होंने कहा कि हर बच्चे में सीखने की क्षमता होती है, जरूरत सिर्फ सही दिशा, उचित अवसर और बेहतर माध्यम उपलब्ध कराने की है। विजुअल लर्निंग और शुरुआती हस्तक्षेप जैसी पहल बच्चों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने समावेशी शिक्षा को मजबूत करने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें हर बच्चा अपनी क्षमताओं के अनुसार आगे बढ़ सके और उसे समान अवसर मिलें।



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