अंकिता हत्याकांड फिर सुर्खियों में, मंत्री सुबोध उनियाल बोले—सबूत लाओ, हर जांच को तैयार

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उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मामले को लेकर विपक्ष के लगातार हमलों के बीच मंत्री सुबोध उनियाल ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता कर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास ठोस सबूत हैं तो सामने लाए जाएं, सरकार हर स्तर की जांच के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईटी की जांच को सत्र न्यायालय, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट सही ठहरा चुके हैं और अदालत ने स्वयं माना था कि इस मामले में सीबीआई जांच की आवश्यकता नहीं है।

दरअसल, यह विवाद एक वायरल वीडियो के बाद फिर से तेज हुआ है। भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर अंकिता हत्याकांड में एक “वीआईपी” के शामिल होने का दावा किया। वीडियो में उन्होंने “गट्टू” नामक व्यक्ति का जिक्र करते हुए उसे भाजपा का बड़ा नेता बताया और एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य के पास पूरे मामले की जानकारी होने का भी दावा किया। इस वीडियो के सामने आने के बाद देहरादून से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई।

वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दिल्ली में प्रेस वार्ता कर वीडियो दिखाया और आरोप लगाया कि सरकार मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की और चेतावनी दी कि यदि दस दिनों के भीतर सीबीआई जांच की सिफारिश नहीं हुई तो कांग्रेस प्रदेशभर में आंदोलन करेगी।

वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस चुनाव से पहले वीआईपी का मुद्दा उछालकर अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाना चाहती है। उन्होंने सवाल किया कि यदि कांग्रेस को वीआईपी के बारे में जानकारी है तो उसका नाम सार्वजनिक क्यों नहीं करती। भट्ट ने कहा कि उस समय डीजीपी ने सार्वजनिक अपील की थी, लेकिन किसी ने भी कोई ठोस जानकारी नहीं दी। उन्होंने वायरल वीडियो को अपुष्ट बताते हुए कहा कि उसके साथ छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई गई है और कांग्रेस इसे राजनीतिक हथियार बना रही है।

गौरतलब है कि 18 सितंबर 2022 को वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत अंकिता भंडारी की हत्या कर उसका शव चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था। एक सप्ताह बाद उसका शव बरामद हुआ। एसआईटी जांच के बाद रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों के खिलाफ करीब 500 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई। मामले में 97 गवाह बनाए गए थे, जिनमें से 47 के बयान दर्ज किए गए। अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

हालांकि, घटना के दिन अंकिता द्वारा एक बड़े वीआईपी के लिए दबाव बनाए जाने की बात सामने आने के बावजूद उस वीआईपी की पहचान आज तक सार्वजनिक नहीं हो पाई है, जिसको लेकर यह मामला समय-समय पर फिर से राजनीतिक बहस का विषय बन जाता है।