बजट सत्रः अपने ही विधायकों के सवालों में घिरे मंत्री, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

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भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में चल रहे उत्तराखंड विधानसभा बजट सत्र 2026 के दूसरे दिन मंगलवार, 10 मार्च को सदन की कार्यवाही प्रश्नकाल से शुरू हुई। इससे पहले विपक्ष ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर चर्चा की मांग की, जिस पर स्पीकर ने नियम 58 के तहत विचार करने का आश्वासन दिया।

प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष के कई विधायकों ने पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों से किसानों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाया। बीजेपी विधायक मुन्ना सिंह चौहान, खजान दास, महेश जीना और विनोद कंडारी ने इस विषय पर सरकार से सवाल किए।
विधायकों ने कहा कि जंगली जानवरों के कारण किसानों की फसलें लगातार नष्ट हो रही हैं और ग्रामीणों में भारी परेशानी है। इस दौरान वन (संरक्षण) अधिनियम से जुड़े प्रावधानों और जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों के अधिकारों को लेकर भी सदन में चर्चा हुई। जवाब देते समय वन मंत्री सुबोध उनियाल से कई सवालों पर स्पष्ट उत्तर की मांग की गई, जिस पर स्पीकर ने भी मंत्री से गंभीरता से जवाब देने की अपील की।

बीजेपी विधायक खजान दास ने वन कानूनों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम लागू हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए पूछा कि उत्तराखंड में सड़कों के निर्माण की परियोजनाएं लंबे समय तक वन स्वीकृति में क्यों अटकी रहती हैं।
इस पर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि हाल के वर्षों में फॉरेस्ट क्लीयरेंस की प्रक्रिया में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष लोक निर्माण, पेयजल और विद्युत समेत छह विभागों के 713 प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।

डोईवाला विधायक बृजभूषण गैरोला ने मानव-वन्यजीव संघर्ष का मुद्दा उठाया। वन मंत्री ने सदन को बताया कि वर्ष 2000 से 31 जनवरी 2026 तक राज्य में वन्यजीव हमलों में 1,296 लोगों की मौत हुई और 6,624 लोग घायल हुए हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे मामलों में मृतकों के परिजनों को दी जाने वाली मुआवजा राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है।

संजय डोभाल, विधायक यमुनोत्री ने यमुनोत्री-खरसाली रोपवे परियोजना की प्रगति पर सवाल उठाया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि परियोजना का टेंडर नई कंपनी को दिया गया है और काम जल्द शुरू किया जाएगा।

सत्र के दूसरे दिन सदन में राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण और भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट भी रखी जानी है। इसके साथ ही चार अध्यादेशों को भी सदन के पटल पर रखा जाएगा।

गौरतलब है कि सत्र के पहले दिन सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,11,703.21 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, जो पिछले बजट की तुलना में लगभग 10.41 प्रतिशत अधिक है।