उत्तराखण्ड में जनगणना-2027 की प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से. नि.) गुरमीत सिंह ने लोक भवन में स्व-गणना (Self Enumeration) के माध्यम से किया। इसके साथ ही प्रदेश में जनगणना के प्रथम चरण की गतिविधियाँ शुरू हो गई हैं।
इस बार की जनगणना को भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना के रूप में संचालित किया जा रहा है, जिसमें सभी आंकड़े डिजिटल उपकरणों के माध्यम से एकत्र किए जा रहे हैं। नागरिकों को भी स्व-गणना की सुविधा दी गई है, जो एक सुरक्षित और वेब-आधारित प्रणाली पर आधारित है।
राज्यपाल ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं और स्व-गणना के माध्यम से सही एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल है, जिससे कोई भी नागरिक आसानी से अपनी जानकारी दर्ज कर सकता है।
उन्होंने युवाओं और सामाजिक संगठनों से भी इस अभियान में सहयोग करने की अपील की, ताकि अधिक से अधिक लोग डिजिटल प्रणाली से जुड़ सकें और कोई भी व्यक्ति इस प्रक्रिया से वंचित न रहे।
जनगणना कार्य निदेशालय, गृह मंत्रालय, भारत सरकार की निदेशक श्रीमती इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य में प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक 30 दिनों की अवधि में किया जाएगा।
उन्होंने आगे बताया कि घर-घर सर्वेक्षण से पहले नागरिकों को 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस दौरान लोग se.census.gov.in पोर्टल पर मोबाइल नंबर और आवश्यक विवरण दर्ज कर स्वयं तथा अपने परिवार की जानकारी डिजिटल रूप से भर सकते हैं। इस अवसर पर सचिव दीपक कुमार भी उपस्थित रहे।



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