नियमितीकरण पर टालमटोल पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने सचिव कार्मिक को किया तलब

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उत्तराखंड में उपनल संविदा कर्मचारियों और वन विभाग के दैनिक श्रमिकों के नियमितीकरण को लेकर चल रहे विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है और सचिव कार्मिक शैलेश बगौली को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।

मंगलवार को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति अलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत के पूर्व आदेशों का अनुपालन न होना गंभीर मामला है। कोर्ट ने सचिव कार्मिक को 20 अप्रैल को सुबह 10:30 बजे न्यायालय में उपस्थित होकर पूरी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह जानना चाहा कि आखिर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद अब तक कर्मचारियों के नियमितीकरण की दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि इस संबंध में अब तक क्या कार्रवाई की गई है।

उपनल कर्मचारी संघ की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने दलील दी कि हाईकोर्ट की खंडपीठ पहले ही नियमितीकरण को लेकर आदेश दे चुकी है, लेकिन राज्य सरकार ने न तो उस पर कोई निर्णय लिया और न ही उसे अदालत के रिकॉर्ड में प्रस्तुत किया। इसे कोर्ट के आदेशों की अवहेलना बताया गया।

इस मामले को लेकर दायर अवमानना याचिकाओं पर शीघ्र सुनवाई की मांग भी की गई थी, जिसे अदालत ने गंभीरता से लिया। कोर्ट ने संकेत दिए कि आदेशों की अनदेखी पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

अब इस मामले में 20 अप्रैल को होने वाली सुनवाई अहम मानी जा रही है। इस दिन सचिव कार्मिक को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर यह बताना होगा कि सरकार कर्मचारियों के नियमितीकरण और न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर क्या कदम उठा रही है।