हल्द्वानी। संदिग्ध अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्ति के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की संस्तुति के बाद होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डॉ. मनीषा कायथ का हल्द्वानी तहसील से जारी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया है। मामले की शिकायत सितारगंज निवासी अनिल कुमार कंबोज ने की थी।
जांच में सामने आया कि डॉ. मनीषा कायथ मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की निवासी हैं। उन्हें वर्ष 1999 में हिमाचल प्रदेश में छिब्बे जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी हुआ था। विवाह के बाद उन्होंने वर्ष 2014 में हल्द्वानी तहसील से धोबी जाति का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र बनवाया। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर उनका चयन होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के पद पर हुआ।
मामले की जांच के लिए 3 अगस्त 2026 को जिला स्तरीय स्क्रूटनी कमेटी की बैठक हुई। कमेटी ने दस्तावेजों के साथ सुप्रीम कोर्ट और उत्तराखंड हाईकोर्ट के संबंधित निर्णयों का परीक्षण किया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि विवाह के बाद दूसरे राज्य में जाने के आधार पर वहां अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ राज्य सेवाओं में नहीं लिया जा सकता।
जिलाधिकारी ने हल्द्वानी तहसील से 22 जनवरी 2014 को जारी प्रमाण पत्र संख्या 040201400069/266 को निरस्त करते हुए तहसीलदार को इसे जब्त करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित विभागों को आगे की कार्रवाई के लिए पत्र भेजे गए हैं। वर्तमान में डॉ. कायथ चंपावत के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पाटी में एनएचएम के तहत संविदा पर कार्यरत हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन नियमों और न्यायिक व्यवस्थाओं के अनुरूप पूरी पारदर्शिता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित कर रहा है।



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