बर्फबारी ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुश्किलें, मौसम अभी बिगड़ा रहने के आसार

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उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी का दौर जारी है। मंगलवार को चकराता की ऊंची पहाड़ियों में इस सीजन का दूसरा हिमपात हुआ, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मौसम विभाग ने पहले ही इस बदलाव का पूर्वानुमान जताया था, जो सही साबित हुआ।

चकराता के लोखंडी, लोहारी, खडंबा, देववन और मुंडाली जैसे ऊंचे इलाके पूरी तरह बर्फ से ढक गए हैं। बुधवार की सुबह धूप खिलने के साथ ही पहाड़ों पर जमी बर्फ की सफेद चादर चांदी सी चमक उठी। बांज, बुराशं और देवदार के पेड़ों पर बर्फ की परत ने दृश्य को किसी प्राकृतिक पेंटिंग जैसा बना दिया।

सीमांत जिले पिथौरागढ़ में हाल ही में हुई भारी बर्फबारी से धारचूला से आदि कैलाश जाने वाली सड़क पर ढाई फुट से अधिक बर्फ जमा हो गई है। चीन सीमा के पास स्थित अंतिम गांव कुटी से आगे आवाजाही पूरी तरह बंद है। ग्राम प्रधान नगेंद्र सिंह कुटियाल के अनुसार, कुटी में लगभग डेढ़ फुट बर्फ जमी है, जिससे सड़कें बाधित हैं। व्यास घाटी के बूंदी, गर्त्यांग, गुंजी, नपलच्यू, रांगकांग, नाबी और कुटी गांवों में बर्फबारी सबसे अधिक रही।

मसूरी में भी मौसम ने अचानक करवट बदली। देर रात हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने शहर को सफेद चादर में ढक दिया। तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई और ठंड बढ़ने से स्थानीय लोग और पर्यटक अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा लेते नजर आए। सुबह होते ही लोग ओलों को हाथ में लेकर फोटो और वीडियो बनाते दिखे, जिससे मसूरी के नजारों की खूबसूरती और बढ़ गई।

मौसम विभाग ने 28 जनवरी के लिए उत्तराखंड के अधिकांश जिलों में भारी बारिश और बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। उत्तरकाशी और चमोली के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुबह से ही बर्फबारी और बारिश देखने को मिल रही है, जबकि मैदानी इलाकों में दोपहर के बाद मौसम सक्रिय होने की संभावना है।

विभाग के अनुसार, 30 और 31 जनवरी को एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिससे 1 और 2 फरवरी तक 2800 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश हो सकती है, हालांकि इसकी तीव्रता थोड़ी कम रहने की संभावना है।

उत्तराखंड में बर्फबारी ने पर्वतीय इलाकों की प्राकृतिक सुंदरता बढ़ा दी है, लेकिन ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों में लोगों के लिए मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं।