उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में दशहरा की रात से उत्तरी खंड गंगनहर बंद होने के कारण हरकी पैड़ी पर गंगा का प्रवाह थम गया है। बुधवार सुबह स्नान और दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को पर्याप्त जल नहीं मिलने से निराश होकर लौटना पड़ा। स्थिति यह रही कि हरकी पैड़ी पर आचमन के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं था। वहीं, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने शाम की गंगा आरती के समय हरकी पैड़ी पर आंशिक रूप से जलधारा छोड़ने की बात कही है।
गंगनहर की वार्षिक मरम्मत और सफाई के चलते हर साल दशहरा से दीपावली के बीच जल प्रवाह बंद किया जाता है। इस अवधि में घाटों की मरम्मत, सीवेज व्यवस्था में सुधार और अन्य जरूरी कार्य किए जाते हैं। इस बार भी उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने गंगनहर में कई कार्य प्रस्तावित किए हैं। इसके साथ ही अर्धकुंभ की तैयारियों से जुड़े कार्य भी किए जाने हैं।
इस वर्ष गंगनहर को 20 अक्टूबर की रात बंद किया गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 7 नवंबर की रात जल प्रवाह दोबारा शुरू किया जाएगा। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने बताया कि वार्षिक बंदी के चलते फिलहाल गंगनहर में पानी रोका गया है। उन्होंने कहा कि हरकी पैड़ी पर जल उपलब्ध कराने का ध्यान रखा जाएगा और विशेष रूप से शाम की गंगा आरती के समय आंशिक जलधारा छोड़ी जाएगी।
हरकी पैड़ी पर गंगा का जलस्तर घटने से जहां श्रद्धालुओं को आस्था के अनुरूप स्नान और आचमन का अवसर नहीं मिल पाया, वहीं कुछ परिवारों के लिए यह रोजी-रोटी जुटाने का मौका बन गया। गंगा की रेत में लोग छलनी और जाल लेकर सिक्के तथा जेवर तलाशते नजर आए। ये परिवार गंगा में श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित किए जाने वाले चढ़ावे को मेहनत से खोजते हैं। इससे मिलने वाले सिक्के और अन्य सामग्री उनकी आजीविका का सहारा बनते हैं।
गंगनहर की वार्षिक बंदी के चलते हरकी पैड़ी पर गंगा का प्रवाह प्रभावित होने से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब लोगों की नजरें शाम की आरती के समय छोड़ी जाने वाली जलधारा और 7 नवंबर को गंगनहर दोबारा चालू होने पर टिकी हैं।




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