उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में श्री टपकेश्वर महादेव के नगर भ्रमण के दौरान बुधवार को द्रोणनगरी भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठी। श्री टपकेश्वर महादेव सेवा दल की ओर से निकाली गई भव्य शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। नृत्य करते शिव स्वरूप, सिर पर कलश लेकर चलती महिलाएं, शिव बरात, भोले की सेना के करतब, आतिशबाजी और हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा ने यात्रा को आकर्षण का केंद्र बना दिया।
शोभायात्रा में उज्जैन से आए डमरू दल ने विशेष प्रस्तुति दी। भजनों के साथ देशभक्ति गीतों ने माहौल को भक्तिमय बनाने के साथ राष्ट्रभक्ति से भी सराबोर किया। फूलों से सजी कई ट्रालियों पर तिरंगे लगाए गए थे। सामाजिक, धार्मिक संगठनों और व्यापारियों ने शहर के विभिन्न स्थानों पर शोभायात्रा का स्वागत किया।
शोभायात्रा का शुभारंभ सुबह शिवाजी धर्मशाला से हुआ, जिसमें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए। उन्होंने भगवान महादेव की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज में आस्था, एकता और आपसी सद्भाव को मजबूत करते हैं। साथ ही नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
मंदिर के श्री 108 महंत कृष्णा गिरी महाराज, दिगंबर भरत गिरी और कैबिनेट मंत्री खजानदास ने भी पूजा-अर्चना की। सुबह करीब 9:30 बजे शोभायात्रा का पहला डोला रवाना हुआ। यात्रा सहारनपुर चौक, झंडा बाजार, रामलीला बाजार, पीपल मंडी, धामावाला बाजार, पलटन बाजार, घंटाघर, चकराता रोड, बिंदाल पुल, कैंट बोर्ड कार्यालय, डाकरा बाजार और गढ़ी कैंट होते हुए श्री टपकेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण पहुंची।
शोभायात्रा में महादेव के चार स्वरूप श्री दूधेश्वर, श्री टपकेश्वर, श्री तपेश्वर और श्री देवेश्वर विशेष आकर्षण रहे। आगरा, दिल्ली, ग्वालियर और देहरादून से आए विभिन्न बैंड दलों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं। उज्जैन महाकाल की आरती में बजने वाला डमरू मंडल, छप्पन भोग के साथ खाटू श्याम, बगलामुखी माता, तिरुपति बालाजी, मेहंदीपुर बालाजी और महाकाल की भस्म आरती की झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।



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