उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (यूटीयू) के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस को आशंका है कि यह मामला केवल हालिया परीक्षा तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि पिछले कई वर्षों में आयोजित परीक्षाओं की गोपनीयता भी प्रभावित हुई हो। इसी संभावना को देखते हुए वर्ष 2010 से अब तक उनके कार्यकाल और परीक्षा संबंधी जिम्मेदारियों की जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि डॉ. आशीष कुमार गुप्ता वर्ष 2010 से प्रदेश के विभिन्न इंजीनियरिंग संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्यरत रहे हैं। इस दौरान उन्होंने डीआईटी यूनिवर्सिटी, जेबीआईटी, उत्तरांचल यूनिवर्सिटी और शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सेवाएं दीं। साथ ही उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कई परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई थी।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि डॉ. गुप्ता ने किन-किन परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार किए और क्या पूर्व में भी किसी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हुआ था। इसके लिए उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप, ई-मेल, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
पेपर लीक मामले के सामने आने के बाद शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने डॉ. आशीष कुमार गुप्ता की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। वहीं उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने भी उन्हें अगले सात वर्षों तक विश्वविद्यालय की सभी परीक्षा संबंधी गतिविधियों से प्रतिबंधित कर दिया है।
यह मामला यूटीयू के परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल की लिखित शिकायत पर प्रेमनगर थाने में दर्ज किया गया था। आरोप है कि 7 और 8 जुलाई को आयोजित होने वाली आंतरिक परीक्षाओं के लिए तैयार किए गए ‘मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ और ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी’ विषयों के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही छात्रों तक पहुंच गए थे।
एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


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