भगवान बदरीविशाल के दर्शन का मौका जल्द, कपाटोद्घाटन की तिथि तय

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उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम के कपाट इस साल 23 अप्रैल को विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वसंत पंचमी के पावन अवसर पर आज ही इस बात की घोषणा की गई। इससे पहले धार्मिक केंद्रीय पंचायत के सदस्य गाडू घड़ा ऋषिकेश के लिए रवाना हुए थे और शुक्रवार को पुजारी गाडू घड़ा के साथ नरेंद्रनगर राज दरबार पहुंचे। यहां परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार भगवान बदरीविशाल धाम के कपाटोद्घाटन की तिथि घोषित की गई।

पिछले साल यानी 2025 में कपाट 4 मई को खोले गए थे और नवंबर में बंद हुए थे। वहीं इस साल 2026 में कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे। बदरीनाथ धाम में भगवान विष्णु के रूप बदरी नारायण की पूजा होती है। मंदिर में 3.3 फीट की शालिग्राम मूर्ति स्थापित है, जिसे आदि शंकराचार्य ने सातवीं शताब्दी में नारद कुंड से निकालकर यहां स्थापित किया था। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह मूर्ति विष्णु के आठ स्वयं प्रकट क्षेत्रों (स्वयंभू प्रतिमाओं) में से एक मानी जाती है।

बदरीनाथ धाम उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। यहां के मुख्य पुजारी, जिन्हें रावल कहा जाता है, केरल राज्य के नम्बूदरी संप्रदाय के ब्राह्मण होते हैं।

वहीं आज, 23 जनवरी, वसंत पंचमी के दिन, भगवान रुद्रनाथ जी के शीतकालीन गद्दी स्थल गोपीनाथ मंदिर में ब्राह्मणों ने पंचांग गणना के आधार पर तिथि घोषित की। रुद्रनाथ जी के कपाट इस साल 18 मई को खुलेंगे।

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा की परंपरा के अनुसार सबसे पहले यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खोले जाते हैं, उसके बाद केदारनाथ, और अंत में बदरीनाथ के कपाट खोले जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इन चारधामों में पूजा-अर्चना केवल ग्रीष्मकाल के छह महीनों के लिए ही होती है।