हल्द्वानी: सर्वोच्च अदालत ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण से जुड़े विवाद में मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने रेलवे की जमीन से बेदखली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि प्रभावित लोगों को उसी जगह पर पुनर्वास का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस डी.वाई. सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमलया बागची शामिल थे, ने कहा कि हालांकि हजारों परिवार बेघर होने की स्थिति में हैं, लेकिन राज्य सरकार को उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत पुनर्वास में मदद करनी चाहिए। इसके लिए प्रभावित लोगों की योजना के तहत पात्रता की जांच करने का निर्देश दिया गया।
अदालत ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम को क्षेत्र में सर्वे करने के आदेश दिए। यह सर्वे 19 मार्च से 31 मार्च तक आयोजित होगा और इसका उद्देश्य प्रभावित परिवारों की वास्तविक स्थिति और उनकी पीएम आवास योजना के तहत पात्रता का सत्यापन करना है। सर्वे के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई से पहले विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं। स्थानीय लोगों की नजरें अब इस सर्वे प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों पर टिकी हैं, जो आगामी निर्णय के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं।



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