उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर निर्माणाधीन विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में गुरुवार शाम हुए भीषण भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव अभियान शुक्रवार को भी जारी है। हादसे में अब तक सात श्रमिकों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि तीन श्रमिक अभी भी सुरंग के भीतर लापता बताए जा रहे हैं। हादसे में 12 श्रमिक घायल हुए हैं।
घटना के दूसरे दिन शुक्रवार तड़के ही जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना समेत विभिन्न एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंच गईं और सुरंग में फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर अभियान शुरू किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को पीपलकोटी पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ सुरंग के अंदर जाकर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। सीएम ने टीएचडीसी के अधिकारियों से हादसे की स्थिति और बचाव अभियान को लेकर विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को राहत-बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।
इसके बाद मुख्यमंत्री जिला अस्पताल पहुंचे और हादसे में घायल श्रमिकों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। बताया जा रहा है कि गुरुवार शाम करीब पौने सात बजे सुरंग के अंदर ग्रेविटी पर पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान अचानक जोरदार धमाका हुआ और पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा सुरंग के भीतर भर गया। हादसे के समय सुरंग में कुल 28 श्रमिक काम कर रहे थे।
हादसे के बाद छह श्रमिक राहत-बचाव कार्य में जुट गए, जबकि अन्य श्रमिकों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। अब तक सात श्रमिकों के शव बरामद हो चुके हैं। तीन श्रमिकों की तलाश अभी जारी है, जबकि 12 घायल श्रमिकों का उपचार कराया जा रहा है। सुरंग में फंसे और लापता श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव टीमें लगातार अभियान चला रही हैं। हादसे का शिकार हुए अधिकांश श्रमिक बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के रहने वाले बताए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव अभियान की लगातार निगरानी की जा रही है।



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