उत्तराखण्ड एसटीएफ ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस, एक अवैध सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल (.30 बोर) और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं।
पुलिस महानिदेशक उत्तराखण्ड दीपम सेठ के निर्देश पर राज्य में अवैध हथियारों व गैंगस्टरों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। पुलिस महानिरीक्षक एसटीएफ डॉ. नीलेश आनंद भरणे के निर्देशन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ नवनीत सिंह भुल्लर के नेतृत्व में गठित टीम ने यह सफलता हासिल की।
एसटीएफ ने मनोज पुत्र भोपाल सिंह, निवासी ग्राम भैंसवाल, थाना गढ़ीपुख्ता, जनपद शामली (उ.प्र.), हाल निवासी केहरी गांव, थाना प्रेमनगर, देहरादून को देर रात गिरफ्तार किया। आरोपी के पास से अवैध हथियार और कारतूस बरामद हुए।
एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि एसटीएफ को सूचना मिली थी कि बाहरी राज्यों के अपराधी फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाकर उत्तराखण्ड की शस्त्र पंजिका में दर्ज करा रहे हैं। जांच में सामने आया कि शस्त्र लाइसेंस संख्या 3805 सिरसा से मेरठ और फिर देहरादून स्थानांतरित दिखाया गया था, जबकि सिरसा जिलाधिकारी कार्यालय से पुष्टि हुई कि यह लाइसेंस कभी जारी ही नहीं हुआ था।
इस आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी को 15 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया। उसके खिलाफ थाना प्रेमनगर देहरादून में धारा 420, 467, 468, 471 भादवि एवं 25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
पूछताछ में आरोपी ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखण्ड में सक्रिय फर्जी शस्त्र लाइसेंस नेटवर्क की जानकारी दी है। एसटीएफ अब अन्य जिलों में दर्ज फर्जी लाइसेंसों और संलिप्त व्यक्तियों की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ पूर्व में भी धोखाधड़ी, बलवा और जान से मारने की धमकी के मामले दर्ज हैं।
इस कार्रवाई में निरीक्षक अब्दुल कलाम, उप निरीक्षक विद्यादत्त जोशी, अपर उप निरीक्षक मनोज बेनीवाल सहित एसटीएफ टीम के अन्य सदस्य शामिल रहे।



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