उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर रविवार को चीड़बाग स्थित शौर्य स्थल पहुंचकर कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शौर्य स्थल पर पुष्पचक्र अर्पित कर देश की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को नमन किया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कारगिल शहीदों के परिजनों और वीर नारियों को सम्मानित किया। उन्होंने उनके साहस, धैर्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण को नमन करते हुए कहा कि शहीद परिवारों का त्याग और आत्मबल पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है। राज्यपाल ने गैलेंट्री अवार्ड प्राप्त वीर सैनिकों और समाज व राष्ट्रहित में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया।
राज्यपाल ने कहा कि कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका त्याग और समर्पण देश के लिए गौरव का विषय है और उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने वीर नारियों और शहीद परिवारों को भरोसा दिलाया कि पूरा राष्ट्र, भारतीय सेना और सैनिक परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा है। किसी भी आवश्यकता या समस्या की स्थिति में हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
राज्यपाल ने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल सैन्य विजय की याद नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय अस्मिता, संप्रभुता, साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक है। कारगिल युद्ध बेहद कठिन परिस्थितियों में लड़ा गया था। बर्फ से ढकी ऊंची चोटियों, कड़ाके की ठंड, कम ऑक्सीजन और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय जवानों ने अदम्य साहस और शौर्य का परिचय देते हुए विजय हासिल की।
उन्होंने कहा कि कारगिल का युद्ध भारतीय सेना के अनुशासन, अदम्य मनोबल और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का अनुपम उदाहरण है। कारगिल के अमर शहीदों का बलिदान इतिहास का महज एक अध्याय नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा में सदैव जलती रहने वाली अमर ज्योति है।
राज्यपाल ने कहा कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह शहीदों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे। साथ ही शहीदों के परिवारों और पूर्व सैनिकों के सम्मान व कल्याण के प्रति संवेदनशील रहना भी समाज की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में जीओसी सब एरिया मेजर जनरल एमपीएस गिल समेत नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी, जेसीओ, देहरादून स्टेशन के सैनिक, एनसीसी कैडेट, स्कूली छात्र-छात्राएं, वीर नारियां, शहीदों की माताएं और पूर्व सैनिक मौजूद रहे।



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