चमोली। कर्णप्रयाग क्षेत्र में सरकारी एक्सप्लोसिव मैगजीन से विस्फोटक सामग्री चोरी के गंभीर मामले का पुलिस ने खुलासा करते हुए चार विधि-विवादित किशोरों को पकड़ लिया है। समय रहते कार्रवाई से पुलिस ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।
लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड कर्णप्रयाग के सहायक अभियंता मयंक तिवारी पुत्र ललित मोहन तिवारी ने 10 जनवरी को कोतवाली कर्णप्रयाग में तहरीर देकर बताया कि 8 जनवरी को विभागीय एक्सप्लोसिव मैगजीन की जांच के दौरान वहां सुरक्षित रखे गए 1399 डेटोनेटर और 25 मीटर फ्यूज वायर चोरी पाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपाधीक्षक चमोली मदन सिंह बिष्ट ने तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण किया।
पुलिस अधीक्षक चमोली सुरजीत सिंह पंवार के निर्देश पर कोतवाली कर्णप्रयाग में मुकदमा अपराध संख्या 01/2026 धारा 305(ड) बीएनएस के तहत दर्ज किया गया। घटना के अनावरण के लिए क्षेत्राधिकारी कर्णप्रयाग त्रिवेंद्र सिंह राणा के पर्यवेक्षण में विशेष पुलिस टीम गठित की गई।
जांच में सामने आया कि अज्ञात चोरों ने एक्सप्लोसिव मैगजीन का ताला पत्थरों से तोड़कर विस्फोटक सामग्री चोरी की थी। मैगजीन का स्थान सुनसान क्षेत्र में होने और समय-तिथि की स्पष्ट जानकारी न मिलने से जांच चुनौतीपूर्ण रही। इसके बावजूद पुलिस टीम ने मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया और घटनास्थल के आसपास लगे 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की भी मदद ली गई।
तकनीकी जांच के दौरान चार नाबालिग किशोर सीसीटीवी फुटेज में पंचपुलिया क्षेत्र की ओर थैले ले जाते हुए नजर आए। मुखबिरों की मदद से पहचान होने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में किशोरों ने स्वीकार किया कि उन्होंने दोपहर करीब 12:30 बजे मैगजीन का ताला तोड़कर डेटोनेटर और फ्यूज वायर चोरी किए थे और उन्हें नदी में मछली मारने व अन्य स्थानों पर पटाखों की तरह फोड़ दिया।
आरोपियों की निशानदेही पर 15 जनवरी को पंचपुलिया नगर पालिका डंपिंग जोन के नीचे नदी किनारे से 239 डेटोनेटर और एक बंडल फ्यूज वायर बरामद किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ फ्यूज तारों को आग में जलाकर नष्ट कर दिया गया था।
चारों विधि-विवादित किशोरों को धारा 305(ड)/331(3)/317(2)/3(5) बीएनएस के अंतर्गत संरक्षण में लेकर किशोर न्याय बोर्ड गोपेश्वर के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।
पुलिस ने कहा कि विस्फोटक सामग्री से जुड़े अपराध अत्यंत गंभीर हैं और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले के सफल खुलासे पर पुलिस अधीक्षक ने जांच टीम की सराहना करते हुए उन्हें 2,500 रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया।



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