ED की कार्रवाई के बाद हरदा का बड़ा ‘त्याग’! दो कांग्रेस पद छोड़ने की पेशकश, अब खड़गे के दरबार में रखेंगे बात

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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने अपने सहयोगी एवं पीए चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई के बाद कांग्रेस में अपने दो पदों से इस्तीफा देने की पेशकश की है। रावत जल्द ही कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात कर अपनी इस इच्छा से अवगत कराएंगे। उन्होंने कहा कि वह नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी सदस्य और प्रदेश कांग्रेस के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से मुक्त होना चाहते हैं, ताकि उनकी वजह से पार्टी की किसी लड़ाई में व्यवधान न आए।

एक समाचार एजेंसी से बातचीत में हरीश रावत ने कहा कि सोमवार या मंगलवार को जब भी उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष से मिलने का समय मिलेगा, वह उनसे मुलाकात करेंगे। यदि मुलाकात नहीं हो पाती है तो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल को पत्र भेजकर अपनी इच्छा से अवगत कराया जाएगा। रावत ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी को नाराज या परेशान करने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश में मजबूती से अपनी लड़ाई लड़ रही है और वह नहीं चाहते कि उनके कारण पार्टी के अभियान पर कोई असर पड़े। भावुक अंदाज में उन्होंने कहा कि यदि वह या उनका कोई कृत्य इस लड़ाई में आड़े आ रहा है तो वह पीछे हटने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जिंदगी में आगे जो होगा, उसका सामना करेंगे और कर्म में जो लिखा होगा, वह स्वीकार करेंगे।

दरअसल, 10 और 11 सितंबर को ईडी ने चंदन सिंह जीना से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई वर्ष 2016 के UKSSSC ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती से जुड़ी अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत की गई। कार्रवाई के दौरान 32 लाख रुपये नकद, करीब 200 ग्राम सोना और रोलेक्स व राडो जैसी 12 लग्जरी घड़ियां बरामद होने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा परिवार के सदस्यों से जुड़े 52.16 लाख रुपये के बैंक खातों को फ्रीज किए जाने की बात भी कही गई। ईडी की कार्रवाई सार्वजनिक होने के बाद 11 सितंबर की रात हरीश रावत ने अपने दोनों संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की पेशकश की थी।

चंदन सिंह जीना लंबे समय से हरीश रावत के करीबी सहयोगी रहे हैं। बताया जाता है कि 1980 में रावत के पहली बार लोकसभा चुनाव जीतने के समय से ही जीना उनके निजी सहायक के तौर पर जुड़े थे। उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनने के बाद रावत के कार्यकाल में जीना करीब तीन वर्ष तक ओएसडी भी रहे। ईडी की कार्रवाई में नकदी और सोना बरामद होने के बाद इन संपत्तियों के स्रोत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

वहीं, भाजपा ने हरीश रावत की इस्तीफे की पेशकश को सियासी ड्रामा और सहानुभूति कार्ड करार दिया है। दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने ईडी की कार्रवाई के समय पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया और रावत के समर्थन में एकजुटता दिखाई। इस पूरे घटनाक्रम के बीच हरीश रावत की इस्तीफे की पेशकश ने उत्तराखंड कांग्रेस की सियासत को गरमा दिया है।