ज्योलिकोट में दूषित पानी पर हाईकोर्ट ने अधिकारियों को लगाई फटकार

12
खबर शेयर करें -

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ज्योलिकोट क्षेत्र में दूषित पानी से बीमारी फैलने के मामले में मंगलवार को  सख्त रुख अपनाया। सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, सीएमओ और जल संस्थान के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश हुए। प्रशासन ने क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने और टैंकरों के माध्यम से पेयजल आपूर्ति किए जाने की जानकारी दी। साथ ही जल स्रोतों के सैंपल सामान्य पाए जाने का दावा किया गया। हालांकि, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े हो गए।

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वीरभट्टी, बेलुआखान, प्रेमा जगाती स्कूल और सरिताताल समेत 10 स्थानों से पानी के नमूने लिए गए थे। इंडियन ड्रिंकिंग वाटर लैब की जांच में सभी सैंपल फेल पाए गए। रिपोर्ट में पानी में घातक बैक्टीरिया की मौजूदगी सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में भी पांच में से चार सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे।

सुनवाई के दौरान खुर्पाताल क्षेत्र के निवासियों की ओर से भी प्रार्थना पत्र पेश किया गया। इसमें सरिताताल के आसपास सीवर लाइन चोक होने से गंदगी के पेयजल स्रोतों और पेयजल लाइनों में पहुंचने की आशंका जताई गई। स्थानीय लोगों ने इससे क्षेत्र में बीमारी फैलने की आशंका व्यक्त की है। हाईकोर्ट ने प्रार्थना पत्र को रिकॉर्ड पर ले लिया।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने पानी के दूषित पाए जाने पर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य को लेकर अधिकारी संवेदनशील नजर नहीं आ रहे हैं। खंडपीठ ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि ग्रामीणों ने करीब एक माह पहले ही बदबूदार पानी की शिकायत की थी, लेकिन समय रहते मामले का गंभीरता से संज्ञान नहीं लिया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पूरे प्रकरण की सीधे निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव को अगले सप्ताह तक व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करना होगा। सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी कोर्ट को दी।

कोर्ट के कड़े रुख के बाद प्रशासन ने जांच के लिए गठित कमेटी में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी शामिल करने की बात कही है। वहीं सीएमओ को प्रभावित परिवारों की स्थिति पर अलग से शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रभावित क्षेत्रों से तत्काल नए सैंपल लेने और प्रशासन को पूरे नैनीताल क्षेत्र में पेयजल की वाटर टेस्टिंग कराने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।