उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनावी मैदान सजने से पहले ही भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने मुद्दों को धार देना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार और उसके विधायकों को घेरने के लिए विधानसभा वार रणनीति तैयार करने का फैसला लिया है, जबकि भाजपा कांग्रेस के इस अभियान को नकारात्मक राजनीति करार देते हुए अपनी उपलब्धियों के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी में है।
कांग्रेस की रणनीति में एसआईआर, महिला सुरक्षा, बेरोजगारी, किसान, पलायन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। पार्टी का दावा है कि इन मुद्दों को लेकर वह लंबे समय से सरकार को घेरती रही है। अब इन्हें आगामी विधानसभा चुनाव में प्रमुखता से जनता के बीच ले जाने की तैयारी है।
एसआईआर को लेकर भी कांग्रेस ने अपना अभियान तेज कर दिया है। पार्टी ने विधानसभा स्तर पर प्रभारी और सह प्रभारी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में यदि किसी के मताधिकार का नुकसान हुआ है तो उसे सामने लाया जाएगा।
इसके साथ ही हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद सामने आए ‘शुद्धिकरण’ विवाद को भी कांग्रेस चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी का आरोप है कि इस घटना से भाजपा की दलित विरोधी सोच सामने आई है। वहीं भाजपा लगातार स्पष्ट कर चुकी है कि शुद्धिकरण करने वाले लोगों का पार्टी से कोई संबंध नहीं है।
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता डॉ. प्रतिमा सिंह के मुताबिक पार्टी भाजपा विधायकों के कार्यों और उनके विधानसभा क्षेत्रों की स्थिति को लेकर रिपोर्ट तैयार करेगी। इसके लिए चार्जशीट कमेटी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पिछले साढ़े नौ वर्षों में सरकार की कथित नाकामियों को जनता के सामने रखेगी।
उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, पलायन, स्वास्थ्य और शिक्षा ऐसे मुद्दे हैं, जिनका असर सीधे आम जनता पर पड़ रहा है। इन सभी मुद्दों को लेकर पार्टी स्तर पर लगातार बैठकें की जा रही हैं। घोषणा पत्र के लिए भी जनता से सुझाव लिए जा रहे हैं।
भाजपा विधायक और प्रवक्ता विनोद चमोली ने कांग्रेस की रणनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष के पास सरकार की कमियां गिनाने के अलावा कोई सकारात्मक एजेंडा नहीं है। कांग्रेस को अपनी उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं के साथ जनता के बीच जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के विकास कार्यों और उपलब्धियों को जनता के सामने रखा जाएगा। साथ ही विधायकों के स्तर पर किए गए कामों की जानकारी भी मतदाताओं तक पहुंचाई जाएगी। चमोली के मुताबिक चुनाव में जनता ही तय करेगी कि कौन सा मुद्दा महत्वपूर्ण है।
ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की सियासत में ‘सरकार की नाकामियां’ बनाम ‘सरकार की उपलब्धियां’ का मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के चुनावी अभियानों के साथ यह तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।


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