उत्तराखंड में विद्यालयी शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर कार्यरत लगभग 20 हजार शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर सरकार समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा निदेशालय में आयोजित समीक्षा बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे शिक्षक संगठनों से संवाद कर एक व्यवहारिक और संतुलित प्रस्ताव तैयार करें।
मंत्री ने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में टीईटी अनिवार्यता को लेकर अपनाए गए निर्णयों और मॉडलों का अध्ययन किया जाए, ताकि शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए बेहतर समाधान निकाला जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समस्या के समाधान में सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
बैठक में शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने निर्देश दिए कि उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं में सरकार की ओर से ठोस पैरवी की जाए, ताकि पदोन्नति से जुड़े मामलों का जल्द निस्तारण हो सके और शिक्षकों को उनका लाभ समय पर मिल सके।
इसके साथ ही उन्होंने विभागीय अधिकारियों को आगामी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) रैंकिंग में सुधार के लिए अभी से तैयारी शुरू करने को कहा। लर्निंग आउटकम, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और शिक्षक प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। साथ ही राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित करने को भी कहा गया।
मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि प्रत्येक छात्र की कम से कम तीन सह-शैक्षणिक गतिविधियों में भागीदारी सुनिश्चित की जाए, राज्य को शत-प्रतिशत साक्षरता की दिशा में आगे बढ़ाया जाए और 30 जून तक सभी प्रकार के अटैचमेंट (संलग्न तैनातियों) को समाप्त किया जाए। बैठक में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।


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