मुसाफिरखाना। इलाहाबाद बैंक के कर्मचारियों के सामने उस समय बड़ी मुसीबत सामने आ गई जब एक किसान अपना कर्ज चुकाने के लिए तीन लाख रुपये के चिल्लर बोरियों में लेकर बैंक पहुंच गया।जमा करने के लिए उसने बैंक में नगद जमा का फॉर्म भरा और चिल्लर की बोरियां बैंक कर्मचारियों की तरफ देना शुरू कर दी। कर्मचारियों ने जब गिनना शुरू करा तो 1 दिन में मात्र एक बोरी चिल्लर ही गिन सके। ₹300000 चिल्लर कितने में कर्मचारियों ने 3 दिन का समय लिया जिसके बाद किसान की लोन राशि उसके खाते में जमा की गई।
क्षेत्र के अभनपुर गांव निवासी पवन कुमार ने इलाहाबाद बैंक से केसीसी पर लोन लिया था। लोन अदा न कर पाने पर बैंक ने उसे किसान ऋण मुक्ति योजना का लाभ दिया। इस योजना से लाभान्वित होने पर पवन को लोन का मात्र आधा हिस्सा जमा करना था। योजना के तहत बाकी पैसा बैंक जमा करती है। बीते मंगलवार को जब पवन बैंक पहुंचा तो उसके पास चिल्लर की बोरियां थी। बैंक के सामने इन चिल्लरो को गिनने की चुनौती खड़ी हो गई। किसान को योजना का लाभ देने के लिए प्रबंधक ने बैंक के तीन कर्मचारियों को लगाया। बोरी में भरे 1,2,5 और 10 के चिल्लर गिनने में उन तीन कर्मचारियों को 3 दिन लगे तब जाकर पैसा बैंक में जमा किया गया।
लोन अदा करने के लिए तीन लाख रुपये के सिक्के लेकर पहुंचा बैंक, तीन दिन में गिन पाए कर्मचारी
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