उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में देहरादून स्थित स्वास्थ्य निदेशालय में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर तैनात रजनी रावत के तबादला आदेश को निरस्त कर दिया। रजनी रावत ने 13 फरवरी 2026 को जारी अपने स्थानांतरण आदेश को अदालत में चुनौती दी थी। उनका कहना था कि उन्हें नियमों का पालन किए बिना चमोली जिला अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि स्थानांतरण आदेश विधि सम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना जारी किया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि स्थानांतरण प्रशासनिक आधार पर किया गया, लेकिन उन्हें न तो सुनवाई का अवसर दिया गया और न ही किसी प्रकार की विधिवत जांच की गई। अधिवक्ता ने उत्तराखंड वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 की धारा 18(4) का हवाला देते हुए कहा कि गंभीर शिकायतों के आधार पर तबादला करने से पहले उचित जांच और तथ्यों की पुष्टि अनिवार्य है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि रजनी रावत ने पूर्व में जारी विभागीय तबादला आदेशों का पालन नहीं किया था और उनके खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी थे।
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि स्थानांतरण से पूर्व न तो कोई ठोस जांच की गई और न ही याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत मानते हुए खंडपीठ ने 13 फरवरी 2026 का स्थानांतरण आदेश रद्द कर दिया।
साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि 15 फरवरी 2026 को रजनी रावत द्वारा दिए गए विस्तृत अभ्यावेदन पर विचार करते हुए उन्हें समुचित सुनवाई का अवसर प्रदान किया जाए और उसके बाद ही नया निर्णय लिया जाए। अदालत ने याचिकाकर्ता को भी जांच में पूर्ण सहयोग करने का निर्देश दिया। इस आदेश के साथ ही खंडपीठ ने याचिका का निस्तारण कर दिया।



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