उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर गढ़वाल में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल (केंद्रीय) विश्वविद्यालय के चौरास परिसर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) अनिल चौहान ने छात्रों से राष्ट्रीय सुरक्षा और आधुनिक युद्ध रणनीतियों पर गहन चर्चा की।
सीडीएस चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सुदृढ़ बनाने में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने भारत में सामरिक शोध की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए प्राचीन युद्ध नीति, धनुर्वेद, चाणक्य नीति और अर्थशास्त्र के उदाहरण दिए। उनके अनुसार, मौलिक और स्वदेशी रणनीतियाँ ही स्थायी सफलता सुनिश्चित कर सकती हैं, जबकि केवल पश्चिमी योजनाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को तीन मुख्य घेरों में बांटा: बाहरी घेरा (कूटनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीक), मध्य घेरा (रक्षा व्यवस्था) और आंतरिक घेरा (आत्मनिर्भरता, सेनाओं की संरचना और युद्ध योजनाओं का क्रियान्वयन)। इसके अलावा उन्होंने पारंपरिक युद्धों के साथ-साथ साइबर, इंटेलिजेंस और सूचना आधारित युद्ध की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
सीडीएस ने छात्रों को बताया कि भारत के सामने दो परमाणु संपन्न पड़ोसी और सीमा विवाद जैसी चुनौतियाँ हैं, जिन्हें दीर्घकालीन तैयारी के साथ छोटे, स्मार्ट युद्ध रणनीतियों से संभाला जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने छात्रों के सवालों के जवाब दिए और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति उनकी सोच को और मजबूत किया।



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