उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में मंगलवार से शुरू हुए विधानसभा के दो दिवसीय सत्र के पहले ही दिन सदन के भीतर श्रद्धांजलि और बाहर विरोध-प्रदर्शन का माहौल देखने को मिला। सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत अन्य सदस्यों ने पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट के योगदान को याद किया। दूसरी ओर, दिवालीखाल और जंगलचट्टी में गैरसैंण राजधानी समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) और अन्य संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बैरियर पार करने का प्रयास किया। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को दूसरी बार वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।
मंगलवार सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई। इससे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा भवन में दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सदन में दोनों नेताओं के राजनीतिक जीवन, जनसेवा और प्रदेश के विकास में उनके योगदान पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि जनरल बीसी खंडूड़ी ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण को प्राथमिकता दी। वर्ष 1991 में गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद बनने के बाद उन्होंने लगातार पांच बार लोकसभा में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को आगे बढ़ाने और राज्य आंदोलन को गति देने में भी उनकी अहम भूमिका रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खंडूड़ी के लिए नाम से अधिक काम का महत्व था। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाए और लोकायुक्त की व्यवस्था बनाने की पहल की। उनके कार्यों में जनसेवा की भावना स्पष्ट दिखाई देती थी। धामी ने कहा कि उनका निधन प्रदेश और देश के लिए अपूरणीय क्षति है।
पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह आम जनता की समस्याओं को समझने वाले जननेता थे। श्रमिकों के प्रति उनका विशेष लगाव था और उन्होंने अपना जीवन आम लोगों के हितों के लिए समर्पित किया। राज्य आंदोलन और प्रदेश के विकास में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन जनसेवा के लिए समर्पित व्यक्तित्वों के विचारों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बीसी खंडूड़ी का राजनीतिक जीवन पांच दशक से अधिक लंबा रहा। उन्होंने अपने कार्यों से उत्तराखंड में अलग पहचान बनाई और सुशासन, प्रशासनिक अनुशासन तथा पारदर्शिता को महत्व दिया। वहीं, मंत्री सतपाल महाराज ने खंडूड़ी को समय का पाबंद बताते हुए कहा कि पहाड़ में सड़क की अहमियत को लेकर उनकी स्पष्ट सोच थी। इसी वजह से उन्हें ‘रोड मैन’ के नाम से भी जाना जाता है।
विधानसभा सत्र के दौरान सदन के बाहर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। गैरसैंण-दिवालीखाल मार्ग पर जंगलचट्टी में यूकेडी, कांग्रेस और स्वराज सेवा दल के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने बैरियर तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। यहां बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जुटे रहे और बैरियर पर चढ़कर विरोध जताया।
कांग्रेस नेता करण माहरा समेत कई कार्यकर्ता बैरियर पर चढ़ गए। इस दौरान पुलिस उन्हें पीछे धकेलती नजर आई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी दिवालीखाल पहुंचे, जहां यूकेडी के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। यूकेडी नेता आशीष नेगी ने भी मौके पर पहुंचकर प्रदर्शन में भाग लिया।
दिवालीखाल में प्रदर्शन कर रहे प्रधान संघ के सदस्यों को पुलिस बस में बैठाकर ले गई। वहीं, दुगथम्बा बैरियर पर पहुंचे यूकेडी के युवा कार्यकर्ताओं ने ‘जय पहाड़, जय पहाड़ी’ के नारे लगाते हुए गैरसैंण राजधानी के समर्थन में आवाज उठाई।
विधानसभा के बाहर विपक्ष के प्रदर्शन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विपक्ष को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखकर बजट पेश कर रही है। इसमें नई योजनाओं के साथ मौजूदा योजनाओं को गति देने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रावधान किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर विधानसभा के भीतर चर्चा होगी और सरकार प्रदेश के विकास के लिए प्रतिबद्ध है।




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