उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मुकदमों की एफआईआर से जुड़ा सार्वजनिक पोर्टल बंद किए जाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य पुलिस से पूछा कि मुकदमे दर्ज होने के बाद उनकी जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।
मामले में हरिद्वार की नेशनल पब्लिक ट्रस्ट की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में लंबे समय से बंद पड़े सार्वजनिक पोर्टल को दोबारा शुरू करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पोर्टल बंद होने के कारण आम लोगों और वकीलों को दर्ज मुकदमों की जानकारी हासिल करने में परेशानी हो रही है।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार एफआईआर दर्ज होने के बाद उसकी जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि पीड़ित पक्ष और उनके अधिवक्ता आसानी से मुकदमे की जानकारी हासिल कर सकें। वहीं, उत्तराखंड में पोर्टल बंद होने के बाद शिकायतकर्ताओं को ओटीपी के माध्यम से जानकारी दिए जाने की व्यवस्था का मुद्दा भी अदालत के सामने उठा।
राज्य पुलिस की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि पोर्टल से जुड़ी पुरानी तकनीकी समस्याओं को दूर कर लिया गया है। अब आम लोग सिटीजन पोर्टल और देवभूमि मोबाइल ऐप के माध्यम से एफआईआर डाउनलोड कर सकते हैं।
हालांकि, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दावा किया कि उन्होंने बुधवार सुबह मोबाइल ऐप में लॉग इन करने का प्रयास किया, लेकिन एप्लीकेशन काम नहीं कर रही थी। इस पर अदालत ने पुलिस के दावे की वास्तविक स्थिति जांचने के लिए तकनीकी प्रदर्शन कराने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 23 सितंबर को एक तकनीकी विशेषज्ञ को अदालत में पेश किया जाए। विशेषज्ञ लाइव डेमो के जरिए यह दिखाएगा कि सिटीजन पोर्टल अथवा संबंधित एप्लीकेशन किस तरह काम कर रही है और आम नागरिक एफआईआर डाउनलोड कर पा रहे हैं या नहीं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पोर्टल को निर्धारित तरीके से जल्द सुचारू नहीं किया गया तो अगली सुनवाई में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना पड़ सकता है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।



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