देवभूमि में पीएम मोदी का संदेश: विकास, आस्था और स्वच्छता पर बड़ा जोर

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड दौरे के दौरान अपने संबोधन की शुरुआत पारंपरिक पहाड़ी भाषा में करते हुए कहा, “उत्तराखंड कु सबी भाई-बैणों तैें मेरो प्रणाम।” इस आत्मीय अभिवादन ने सभा में मौजूद लोगों का दिल जीत लिया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश तेजी से प्रगति कर रहा है और एक समय वीरान रहने वाले गांव अब फिर से बसने लगे हैं। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का भारत जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में दिल्ली मेट्रो का विस्तार और नमो भारत रेल सेवा देश को समर्पित की गई थी, और अब देहरादून–दिल्ली एक्सप्रेसवे का शुभारंभ इसी विकास यात्रा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में देश में बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास होना भारत की नई शक्ति को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर देते हुए कहा कि प्लास्टिक की बोतलें और कचरा देवभूमि की पवित्रता को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि तीर्थ स्थलों और धार्मिक स्थानों को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास करें। उन्होंने आगामी हरिद्वार कुंभ मेले का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे दिव्य, भव्य और स्वच्छ बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जानी चाहिए।

सामाजिक मुद्दों पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू होना चाहिए, और यह संविधान की भावना के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने इस दिशा में पहल कर देश को एक नई राह दिखाई है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सामाजिक न्याय के लक्ष्य के साथ हर गरीब और वंचित तक समान अवसर और विकास पहुंचाने के लिए काम कर रही है।

प्रधानमंत्री ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन गरीबों और वंचितों के अधिकारों के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि सरकार उसी भावना के साथ सामाजिक न्याय को आगे बढ़ा रही है और विकास को हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

आगामी चारधाम यात्रा का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने पंच बद्री, पंच केदार, पंच प्रयाग और अन्य देव स्थलों को नमन किया। उन्होंने डाट काली माता का आशीर्वाद बताते हुए कहा कि इसी आशीर्वाद से बड़े प्रोजेक्ट सफल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड अब अपने 26वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और यह एक्सप्रेसवे राज्य के विकास में एक नया अध्याय जोड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इस शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड के विकास का दशक साबित होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि यह एक्सप्रेसवे केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि गाजियाबाद, बागपत, बड़ौत, शामली और सहारनपुर जैसे क्षेत्रों को भी नई कनेक्टिविटी देगा, जिससे पूरे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे ज्योतिष में हाथ की रेखाएं भविष्य बताती हैं, वैसे ही किसी देश की “भाग्य रेखाएं” उसकी सड़कें, हाईवे, एक्सप्रेसवे, रेलवे, एयरवे और जलमार्ग होते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत ने इन्हीं भाग्य रेखाओं को मजबूत किया है, ताकि देश विकसित भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके।