गौला नदी में खनन सत्र अंतिम दौर में, जल्द थमेगी वाहनों की गूंज

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कुमाऊं मंडल की जीवनरेखा कही जाने वाली और राज्य में सबसे अधिक राजस्व देने वाली गौला नदी में खनन सत्र अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। नदी के विभिन्न निकासी गेटों से अब तक अधिकांश खनन लक्ष्य पूरा हो चुका है, जबकि करीब 8 लाख घन मीटर उपखनिज अभी शेष रह गया है।

वर्तमान स्थिति के अनुसार, प्रतिदिन लगभग 34 हजार घन मीटर उपखनिज की निकासी हो रही है। इसी गति से खनन कार्य जारी रहा तो अनुमान है कि आगामी करीब 23 दिनों में, यानी लगभग 8 मई तक गौला नदी के सभी निकासी गेटों पर खनन गतिविधियां समाप्त हो जाएंगी। इसके बाद यहां फावड़ों और बेलचों की आवाजें थम जाएंगी।

गौरतलब है कि हल्द्वानी से लेकर उधम सिंह नगर के शांतिपुरी क्षेत्र तक फैले गौला नदी के विभिन्न गेटों पर प्रतिदिन लगभग 7000 से अधिक वाहनों का संचालन होता है। इन वाहनों के माध्यम से प्रतिदिन 34 से 36 हजार घन मीटर उपखनिज की निकासी की जाती है, जिससे राज्य को महत्वपूर्ण राजस्व प्राप्त होता है।

इस बार का खनन सत्र अपेक्षाकृत सामान्य रूप से संचालित रहा है और लक्ष्य भी तय समय के भीतर पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है। तराई केंद्रीय वन विभाग के गौला रेंज के वन क्षेत्राधिकारी चंदन सिंह अधिकारी ने बताया कि यदि परिस्थितियां सामान्य रहीं तो मई के दूसरे पखवाड़े तक शेष लक्ष्य भी पूरा कर लिया जाएगा।