उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक बारिश और गरज-चमक की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम के बदलाव का असर पर्वतीय क्षेत्रों के साथ मैदानी इलाकों में भी देखने को मिल सकता है। प्रशासन ने मौसम को देखते हुए चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, 7 अक्टूबर को कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। देहरादून समेत छह से अधिक पर्वतीय जिलों में 9 अक्टूबर तक येलो अलर्ट जारी रखा गया है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम का असर और अधिक रहने की संभावना जताई गई है।
प्रदेश के 4200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सीजन की पहली अच्छी बर्फबारी का दौर शुरू हो गया है। केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी से पहाड़ों में ठंड बढ़ने लगी है। आने वाले दिनों में इसका असर निचले इलाकों में भी दिखाई देने की संभावना है।
बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी जारी की है। पर्वतीय मार्गों पर तेज बारिश के दौरान भूस्खलन और चट्टानें गिरने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में यात्रियों को मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करने और असुरक्षित स्थानों पर रुकने से बचने की सलाह दी गई है।
इससे पहले देहरादून में मंगलवार को कई इलाकों में तेज बारिश हुई। तेज हवाओं के चलते कुछ स्थानों पर पेड़ों की शाखाएं गिरने और बिजली के तार टूटने की घटनाएं सामने आईं। संबंधित विभागों की ओर से इन्हें दुरुस्त करने का काम जारी रहा।
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के मुताबिक प्रदेश में मौसम में आया यह बदलाव मानसून की सक्रियता के कारण नहीं है। उत्तराखंड से मानसून की आधिकारिक विदाई हो चुकी है। फिलहाल उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से उत्तराखंड में बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की स्थिति बन रही है।
मौसम विभाग ने अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही प्रदेश में मौसम में बदलाव की संभावना जताई थी। अब बारिश और बर्फबारी के चलते प्रदेश में तापमान में गिरावट के साथ ठंड का असर बढ़ने की संभावना है।




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