उत्तराखंड में मानसून के बीच एक बार फिर प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला है। भारत-चीन सीमा से सटी चमोली जिले की संवेदनशील नीती घाटी में तमक नाले ने अचानक विकराल रूप धारण कर लिया। तेज बारिश के बाद नाले में आए जलसैलाब और मलबे ने भारी तबाही मचा दी। पानी के तेज बहाव में नाले पर बना बैली ब्रिज बह गया, जबकि एक ट्रक और एक अन्य वाहन के साथ सीमा सड़क संगठन (BRO) के एक कर्मचारी के भी बहने की सूचना है। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है।
बताया जा रहा है कि तमक क्षेत्र में अतिवृष्टि के कारण नाले का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ा। कुछ ही देर में पानी का बहाव इतना खतरनाक हो गया कि नाले पर बना बैली ब्रिज इसकी चपेट में आ गया। पुल के बहने के साथ ही क्षेत्र में आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई। घटनास्थल के आसपास मौजूद वाहन भी तेज बहाव में बह गए।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन ने स्थिति की जानकारी जुटानी शुरू की। ज्योतिर्मठ के उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ के मुताबिक, BRO के मेजर से बातचीत में एक ऑपरेटर के लापता होने की जानकारी मिली है। बताया गया कि ऑपरेटर मशीन पर काम कर रहा था, इसी दौरान अचानक पानी का बहाव बढ़ गया और उसका संपर्क टूट गया। फिलहाल उसके बहने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन इसकी पुष्टि सर्च अभियान पूरा होने के बाद ही होगी।
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बताया कि प्रारंभिक सूचना के अनुसार एक पुल, एक गाड़ी, एक ट्रक और हवलदार रैंक के कर्मचारी के बहने की जानकारी मिली है। अन्य कर्मचारियों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। प्रशासन की टीमें घटनास्थल की ओर रवाना हो चुकी हैं।
एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आपदा प्रबंधन और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर लापता कर्मचारी की तलाश करेंगी। साथ ही जलसैलाब से हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावित क्षेत्र में राहत कार्य शुरू किया जाएगा। सीमांत क्षेत्र में सड़क संपर्क बाधित होने के कारण बचाव दलों के सामने भी चुनौती बनी हुई है।
बैली ब्रिज के बह जाने से नीती घाटी की ओर आवाजाही पर असर पड़ा है। प्रशासन ने क्षेत्र के लोगों और वहां मौजूद अन्य व्यक्तियों से नदी-नालों के आसपास जाने से बचने की अपील की है। लगातार बारिश और अचानक बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों को अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी के बीच हुई इस घटना ने पहाड़ों में मानसून के खतरे को और बढ़ा दिया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। फिलहाल राहत टीमों के मौके पर पहुंचने के बाद ही घटना में हुए वास्तविक नुकसान और लापता कर्मचारी की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।



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